Inspirational, Star's Story

Tom Cruise

एक जोरदार झगड़े के बाद उसकी माँं ने उसके अमीर पिता का घर छोड़ दिया। एक बोझिल सी शाम में उसकी माँं उसे व उसकी बहन को पिता के आलीशान बंगले से निकालकर किराए के एक छोटे से घर में ले आई। खैर बहन और माँं के दिलो-दिमाग में जो तूफान उठा था उसको वह समझ सकता था लेकिन उसे अपने पिता से दूर होने की खुशी थी क्योंकि पिता से हमेशा उसको डांट और पिटाई हीं मिली और उसी पिता की वजह से उसे 12 साल की उम्र में 15 स्कूल बदलनी पड़ीं। वह पढ़ने में बहुत तेज नहीं था। औसत से कम कहना भी गलत न होगा क्योंकि वह डिस्लेक्सिया से पीड़ित था जिसकी परवाह उसके शिक्षकों को नहीं थी। यहां तक कि उसकी मां को भी कभी इस बात की परवाह नहीं हुई, खैर सच तो यह है कि वह जमाना भी ऐसा नहीं था कि डिस्लेक्सिया जैसी बीामरियों की परवाह की जाए, जबकि घर में खाने के लाले पड़े हों।

वह एक महान खिलाड़ी बनना चाहता था कि क्योंकि वह जानता था कि वह ज्यादा पढ़-लिख नहीं सकता। वह खेलने में पूरी ताकत और जुनून लगा देता और उसको इस बाद की खुशी की उसके पास खुद की इज्जत करने की कोई वजह तो है। वह फ्लोर हाॅकी में मशहूर होने लगा था। एक दिन खेल के दौरान उसने ऊपरी जबड़े के सामने के दो दाँंत खो दिए और उसका दायां घुटना बुरी तरह जख्मी हो गया। अ बवह खेल नहीं सकता था, लेकिन उसे तमाशबीन या भीड़ का हिस्सा बनना मंजूर नहीं था। कुछ दिनों, जब तक घुटना पूरी तरह ठीक नहीं हुआ उसने स्ूिल के कार्यक्रमों में अभिनय करना शुरू कर दिया। एक तरफ कुछ बड़े ख्वाब बुनती-उधेड़ती तक दूसरी तरफ लगभग मुफलिसी के हालात ने उसकी जिंदगी को एक अजीब रंग दे दिया जिसमें उसे खुद के लिए कुछ भी तय करना बहुत मुश्किल लगता था। जिंदगी की उछलती-थमती इन्हीं लय तालों में कभी उसने अखबर बांटकर मां को घर चलाने में मदद की तो कभी पादरी बनकर दुनियावी झंझटों से दूर जाने के विकल्पों पर काम किया। कभी अभिनय तो कभी खेल ये दो आयाम उसकी जिंदगी के तमाम पहलुओं में किसी बड़े पेड़ के तने से लिपटी बेल की तरह पलते रहे।

वह खुद नहीं जानता कि कैसे वह एक स्नातक बना और न्यूजर्सी विश्वविद्यालय में दाखिल हुआ। यहां वह विश्वविद्यालय के टीम में फुटबाल खेलने लगा, लेकिन उसकी मां उसे अभिनय करने के लिये ज्यादा प्रेरित करती। एक दिन टीम के कुछ खिलाड़ियों के साथ मैदान में शराब पीते हुए पकड़े जाने पर उसे फुटबाॅल टीम से बर्खास्त कर दिया गया। अब उसने अभिनय को अपना भविष्य बनाने की ठानी। मुश्किलें यहां भी कम नहीं थीं, उसका छोटा कद और सामने के दो टूटे हुए दाँंतों की जगह लगे नकली दांत उसके लिए बार-बार्र अिभनय को एक बुरा सपना साबित करते। लेकिन उसने भी ठान लिया था कि बुरे समने को हीं बेहतर साबित करना है।

खैर तमाम तरह की मुश्किलो और किस्मत के उतार-चढ़ाव के बीच 1981 में उसने अपनी पहली फिल्म की जिसमें उसे बहुत छोटी से भूमिका मिली लेकिन इसके बाद उसे कभी उस तरह के मुश्किल दिनों का सामना नहीं करना पड़ा था जो उसकी आदत बन गए थे। 1986 में टाॅप गन नाम की फिल्म से रूपहले पर्दे की सुरमयी दुनिया में धूम मचाता यह किशोर कब दुनिया का सबसे बढ़ा फिल्मी सितारा बन गया उसे खुद भी पता नहीं चला। यह टाॅम क्रूज उर्फ टाॅमस क्रूज मापोदर की जिंदगी की हकीकत है। बकौल टाॅम “जिंदगी आपकी परवाह नहीं करती और न हीं आपसे यह पूछती है कि आप कौन हैं, जिंदगी बदतर हालात पेशकर आपकी काबिलियत जाँंचती है और किस्मत बनकर बुरे हालात में की गई कड़ी मेहनत का इनाम देती है।”

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