Inspirational, Star's Story

Pele

               वक्त से आगे रहने के लिए एक प्रेरणा काम कर रही थी। यह ऐहसास जो हमेशा साथ था कि मुझे सामान्य जीवन का सौभाग्य नहीं मिला और इसने मुझे सफल होने के लिए अतिरिक्त प्रेरणा दी ताकि मेरे पिता मुझपर गर्व कर सकें। मैं हर उस काम को छोड़ने के लिए तैयार था, जिसे आमतौर पर मेरी उम्र के बच्चे करते थे। बल्कि मैं अपना ज्यादातर समय अभ्यास करने और अपनी कुशलताओं को सुधारने में लगाता था। दूसरों से बेहतर बनने के लिए मुझे पहले हीं तैयारी करनी थी।

फुटबाॅल और उसके पैरों की जुगलबंदी गजब की थी, जब वह फुटबाॅल को घर के कमरों में इधर-उधर लुढ़काता तो उसके गरीब पिता को खुद पर खीझ आने लगती, उसके पिता को खुद की गरीबी पर गुस्सा आता तो बेटे की प्रतिभा पर नाज भी होता था। उसके पिता को लगता थाी कि किस्मत ने उसके बेटे के साथ बहुत भद्दा मजाक किया है। लेकिन उसके जुनून ने किस्मत को भी साथ देने के लिए मजबूर कर दिया। जब वह महज 11 साल का था तो खुद से दोगुने उम्र के लड़को के साथ फुटबाॅल खेलता था। फुटबाॅल के मैदान पर उसके पैर अलग हीें आकर्षण पैदा करते थे जिसे चाह कर भी नकारा नहीं जा सकता था।

उसके खेल से प्रभावित होकर, एक स्थानीय फुटबाॅल कोच ने उसे खेल की बारीकियां सिखानी शुरू की। वह कोच की हर बात को ध्यान से सुनता और समझता, लेकिन जो भी कोच सिखाता उसको करके देखने के लिए उसे फुटबाॅल की जरूूरत थी, जिसे खरीदने के लिए उसके पास पैसे नहीं थे। लेकिन उसने एक तरकीब निकाली, अखबार को पानी में भिगोकर, उससे रस्सी से लपेटकर फुटबाॅल बनाई और उसी से खेलना शुरू किया। जल्द हीं वह अपने स्कूल के माइनर-लीग क्लब के लिए खेलने लगा। उसके खेल से उसकी टीम हीं नहीं, प्रतिस्पर्धी टीेमें भी उसकी मुरीद होने लगीं, लेकिन वह अब भी गरीब था और हर दिन गरीबी होने की तकलीफों को झेलता था। पाई-पाई जुटाकर पेट भरना हीं उसकी किस्मत थी।
उसे पैसों के लिए लोगों के जूते पाॅलिश करने में कभी शर्म महसूस नहीं हुई। तमाम तकलीफों में उसे कुछ राहत देता था, तो वह फुटबाल का मैदान था। फुटबाॅल के मैदान पर आकर वह खेल में इतना डूब जाता कि वह अपनी तंगहाली और तकलीफों को भूलकर आशाओं के समंदर में गोते लगाने लगता, और आखिरी में वह कामयाब हुआ। फुटबाॅल का मैदान उसका एकछत्र साम्राज्य बना और वह फुटबाॅल की दुनिया का बेताज बादशाह। दुनियाभर में फुटबाॅल का यह नायक पेले के नाम से मशहूर हुआ। फुटबाॅल खिलाड़ी एडसन एरैंटेस डो नासकिमेंटो ब्राजील के ट्रेस कोरैकोएस में एक बहुत हीं मामूली से घर में पैदा हुआ, तमाम मुश्किल हालातों के बीच अपने जुनून को जिंदा रख, सदी के खिलाड़ी की उपाधि हासिल करने वाले पेले की कहानी को तामा लोगों ने अपने-अपने तरीके से बयान किया।

सैकड़ों बार खुद पेले ने यह अहसास कराया कि जब उसने छोटे से लड़के के रूप में खुद की इबारत लिखनी शुरू की थी तब से हीं वह जानता था कि उसे असाधारण बनने के लिए कुछ आसाधारण हीं करना होगा। बहरहाल आज पेले के नाम को किसी परिचय की जरूरत नहीं, उसने खुद के मुताबिक खुद की इबारत रची जो नामुमकिन था उसे किया। पेले का मानना है कि जरूरी नहीं हर किसी के हालात असाधारण हों तभी वह कुछ असाधारण करे, बल्कि साधारण हालात में असाधारण किया जा सकता है बस जरूरत है तो से आगे निकलकर खुद को देखने की।

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