Inspirational, Motivation, Star's Story

Lionel Andrés Messi

रोसरियो अर्जेंटीना में एक फैक्ट्री मजदूर पिता और क्लीनर माता की तीसरी संतान लियोनेल आंद्रेसे मेसी आज खेलों की दुनिया का कोहिनूर कहलाता है जिसके दुनिया के हर कोने में करोड़ो प्रशंसक हैं। लेकिन एक वक्त था जब फुटबाल के इस बेताज बादशाह के परिवार के पास बीमारी के इलाज के पैसे नहीं थे। मेसी के पिता खुद फुटबाॅल के अच्छे खिलाड़ी थे और उन्हीं ने मेसी को रोसरियो के ग्रंडोली क्लब में फुटबाॅल की शुरूआती तालीम दी थी। मेसी को फुटबाॅल खेलने का हुनर पैदाइश हीं मिला था।

1995 में मेसी न्यूवेल ओल्ड बाॅयज क्लब (रोसरियो का स्थानीय क्लब) में खेलने लगा। 11 वर्ष की उम्र में पता चला कि मेसी को विकास हार्मोन की कमी संबंधी बीमारी है। बीमारी के चलते मेसी का खेल प्रभावित होने लगा हालांकि मेसी का खेल काफी हद तक प्रभावी था जिसके चलते दूसरे कईं क्लबों ने मेसी में रूचि दिखाई लेकिन कोई भी मेसी के इलाज का खर्चा उठाने के लिये तैयार नहीं था। मेसी का परिवार आर्थिक रूप से इतना सक्षम नहीं था कि तकरीबन 100 डाॅलर प्रतिमाह का इलाज करा सके। इसी दौरान कैटालोनिया स्थित किसी रिश्तेदार की मदद से स्पेन मे मेसी का एक स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और वहीं पर बार्सिलोना क्लब के खेल निदेशक काल्र्स रिक्सैक के सामने मेसी ने अपने खेल का प्रदर्शन किया। खेल देखने के बाद बार्सिलोना क्लब द्वारा मेसी के सभी खर्च उठाने और एक लंबे समय के खेल अनुबंध पर चर्चा हुई, हालांकि मेसी के पिता ऐसा नहीं चाहते थे कि कोई खास तरह का अनुबंध करें लेकिन उनके पास इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं था। बार्सिलोना में प्रशिक्षण और इलाज से मेसी का खेल लगातार निखरता गया। 2004 में एस्पैनयाॅल के खिलाफ मैच खेलकर अधिकारिक रूप से फुटबाॅल की दुनिया में कदम रखने वाला छोटा सा लड़का मेसी फुटबाॅल की दुनिया का सबसे चमकता सितारा बनने लगा। यहां से कभी मेसी को पीछे नहीं मुड़ना पड़ा और अब मेसी दुनिया के सर्वकालिक महान खिताड़ियों में शुमार किया जाने लगा।

कईं उतार-चढ़ावों के साथ मेसी ने अपना पूरा ध्यान खेल पर बनाए रखा, फुटबाॅल में चोटिल होना बहुत आसान है ज्यादातर खिलाड़ी किसी न किसी तरह से चोटग्रस्त हो हीं जाते हैं। मेसी के साथ भी ऐसा हुआ। मार्च 2006 में चेल्सी क्लब के खिलाफ दूसरे दौर के खेल में दाहिने पैर की जांघ की मांस-पेशियां बुरी तरह से फट गईं। मेसी के लिये एक-कदम चल पाना भी मुश्किल हो गया था। लेकिन फिर भी मेसी ने खेल को पूरा किया और दो गोल दागते हुये बार्सिलोना क्लब को जीत दिलाई। चिकित्सकों के मुताबिक जिस हालात में मेसी ने फुटबाॅल खेला और दो गोल दागे उस हालात में किसी भी व्यक्ति के लिये किसी दूसरे के सहारे बिना टहलना भी संभव नहीं, डाॅक्टर मेसी के दर्द को सहने की क्षमता और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता से अचंभित थे क्योंकि मेसी ने असंभव को संभव किया था। हालांकि बाद में मेसी को लगभग छह महीने मैदान से बाहर रहना पड़ा। इसी तरह की समस्या का मेसी को एक बार और सामना करना पड़ा, जब उसके दाहिने पैर की अंगुलियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, तब भी उसे तीन महीने के लिए मैदान से बाहर रहना पड़ा था। लेकिन जब भी वापसी की तो भूखे शेर की तरह गोल करने का नया रिकार्ड कायम कर दिया। मेसी एक लीग सीजन में सबसे ज्यादा गोल करने वाला सबसे कम उम्र का खिलाड़ी बना।

मेसी अपनी कामयाबी को एक ख्वाब मानता है, बीबीसी वल्र्ड को दिए एक साक्षात्कार में मेसी बताता है कि आज वह जो कुछ भी है वह उसके और परिवार के ख्वाबों को शक्ल देने की कोशिश भर है। मेसी के मुताबिक हकीकतों से ज्यादा ख्वाबों के करीब रहना चाहिए, हकीकत की उलझनों और परेशानियांे से इंसान केवल निराश और हताश होता है, वहीं ख्वाबों में रहकर ख्वाबों के लिए जीना हमें उम्मी से भर देता है और हम हककीकत के तपते लावे और चट्टान जैसी परेशानियों से बहुत आसानी से लड़ जाते हैं। बकौल मेसी, हमे खुद को आजमाना चाहिए बार-बार आजमाना चाहिए, अगर हम अच्दे नहीं हैं तो अच्छे हो जाएंगे और किसी एक बार की आजमाइश में हम अपनी ख्वाबों की दुनिया में हकीकत बन खडे होंगे।

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz